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जल कुछ तथ्य

आधुनिक और प्राचीन वैज्ञानिकों के अनुसार पृथ्वी पर जीवन का प्रारम्भ जल से हुआ था।

जीवन के अस्तित्व और संचालन के लिये जल मूलभूत आवश्यकता है। जल सभी जीवित प्राणियों का एक प्रमुख अवयव(component) है।

व्यस्क मनुष्यों के शरीर का 70 प्रतिशत से अधिक भाग जल से बना होता है और पशुओं व पेड़ पौधों में 50 से 90 प्रतिशत तक जल होता है।

मनुष्य के शरीर में मस्तिष्क 95 प्रतिशत तक जल से बना होता है, रक्त में 82 प्रतिशत, फेफड़ों (lungs) में 90 प्रतिशत तक जल होता है।

यदि मनुष्य के शरीर में केवल 2 प्रतिशत जल कम हो जाये तो मनुष्य निर्जलीकरण (dehydration) से पीड़ित हो जाता है।

मनुष्य जल का प्रयोग पीने, सफाई करने, खाना पकाने, मनोरंजन के लिये, निर्माण के लिये, शीतलन (Cooling) के लिये, कृषि के लिये, उद्योगों में,

इन उपयोगों में प्रयोग करने लायक ताजे जल के पृथ्वी पर सीमित मात्रा में हैं।

पृथ्वी पर कुल जल की मात्रा स्थिर (constant) और निश्चित है, वह कम या अधिक कभी नहीं होती।

पृथ्वी पर विद्यमान कुल जल का 97.5 प्रतिशत भाग समुद्रों में है जो समुद्रीजल (seawater) कहलाता है। यह जल मनुष्य के इस्तेमाल के लायक नहीं है।

पृथ्वी पर विद्यमान कुल जल का 2.5 प्रतिशत भाग जो मनुष्य, वनस्पति और अन्य थलचरों के इस्तेमाल के लायक है वह मीठाजल (freshwater) कहलाता है।

कुल उपलब्ध मीठे जल का 70 प्रतिशत ध्रुवों पर बर्फ, हिमनद (glaciers), और पहाड़ों पर जमी बर्फ के रूप में है, तथा 30 प्रतिशत भूगर्भ (underground), नदियों, झीलों और वायु में नमी (Moisture) के रूप में है।

अनुमानतः 110000 घन किलोमीटर ( 110000 KM3) जल प्रतिवर्ष पृथ्वी की सतह पर वर्षा, बर्फ और हिमपात (snow) के रूप में बरसता है जो मीठेजल की आपूर्ति करता है।

जल समुद्र और पृथ्वी की सतह से वाष्पित (Evaporate)  होकर वायुमंडल में जाकर बादल बनता है और वर्षा और हिमपात के रूप में पुनः पृथ्वी पर गिर कर नदियों, झीलों और भूगर्भ में जल की आपूर्ति करता है। यह चक्र निरन्तर चलता रहता है और मीठेजल की आपूर्ति करता रहता है। इसे जलचक्र (hydrological cycle) कहा जाता है।
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